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Thursday, December 24, 2009

शर्म मगर इन्हें आती नहीं....




रुतबा इतना बड़ा कि हर कोई हैरान हो जाये ....और काम ऐसे कि शर्म भी.शर्मिंदा हो जाए। जी हाँ यही परिचय है इन साहब का। एक छोटी सी बच्ची जो इनकी बेटी कि उम्र की होगी,से छेड़छाड़ का आरोप है इन पर । उन्नीस साल से केस चल रहा था ,लड़की ने शर्मिंदा होकर आत्महत्या कर ली,घर वाले डर कर भूमिगत हो गए,सहेली ने केस लड़ा......और सजा मिली केवल महीने की। ये है कहानी हमारी कानून व्यवस्था की। अगर आरोपी हरयाणा का पूर्व डी जी पी राठौर हो तो यही होगा। हाँ अगर आरोपी हम जैसा कोई आम इंसान होता तो आज भी जेल में सड रहा होता। यही है हमारा कानून,जिसे ये रसूख वाले अपने मन मुताखिब ढंग से .चलाते है और फिर मामूली सजा पाकर बच निकलते है।


इस मामले में सबसे शर्मनाक पल वो था जब ६ महीने की सजा सुन कर राठौर साहब हँसते हुए बाहर निकले। ये हमारी न्यायिक व्यवस्था पर एक व्यंगात्मक चोट थी,जिसे हर एक देशवासी ने महसूस किया। आखिर सबको समान न्याय का सपना कब और कैसे पूरा होगा?आज रुचिका हमारे बीच में नहीं है लेकिन उसकी आत्मा ये सब देख कर जरूर रो रही होगी..और कोस रही होगी हमारी व्यवस्था को..

Sunday, December 13, 2009

पानी रे पानी....

हालात को देखते हुए ये सपष्ट है की अगला विश्व युद्ध पानी के लिए ही लड़ा जाएगा.पूरे विश्व में ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रभाव से ग्लेशियर पिघल रहे है.पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ने से हिमखंड .पिघलते जा रहे है.इससे जहाँ नदियों में पानी की .मात्रा बढ़ रही है वहीँ बहुत से शहरों के डूबने का खतरा हो गया है.समुन्द्र के जल स्तर में मामूली सी बढ़ोतरी से अनेक शहर और देश डूब जायेंगे।
अब इस कहानी का दूसरा पहलू भी है.पूरे विश्व में पीने योग्य जल की भारी कमी हो गई है .समुन्द्र का पानी जहाँ बढ़ता जा है वहीँ पेय जल घटता जा रहा है..शहरों में जहाँ पीने का पानी नहीं मिल रहा वहीँ गाँवों में खेती के लिए भी पानी नहीं है.किसान नित रोज आन्दोलन कर रहे है लेकिन सरकार बेबस है क्योंकि नहरों में जल सिमित है.पानी अमृत के समान कीमती हो गया है.हमारे राजस्थान में तो पानी को अमृत ही माना जाता है.दूर दूर तक फैले टीलों और तपती धूप में पानी की एक बूंद प्यासे के लिए अमृत से कम नहीं है.देश में पानी का संकट इतना बढ़ गया है कि बड़े बड़े शहरो में एक समय ही जल आपूर्ति की जा रही है.
पानी के लिए हाहाकार के बीच बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने प्यास को भी बेचने या भुनाने का धंधा शुरू कर दिया है.पानी की एक बोतल को दस दस रुपये में बेचा जा रहा है.एक ऐसे देश में जहाँ लोग प्यासों के लिए प्याऊ खुलाते थे ,वहां आज पानी को भी बेचा जा रहा है। राजस्थान के सुदूर किसी गाँव में ,जहाँ पानी बहुत कीमती है ...वहां पर भी आप को प्याऊ दिख जायेंगे पर यहाँ देखिये प्यास को भी बेचा जा रहा है .इस सब के बीच हर जगह जल कि बर्बादी देख के भी दिल दुखता है.हमने अभी भी जल का महत्त्व नहीं सीखा.तभी तो जितना काम लेते है उससे कहीं ज्यादा जल हम व्यर्थ में बहा देते है.अभी भी हमने पेय जल का महत्त्व नहीं समझा है,तभी तो पीने वाले पानी से ही हम कपड़े धोते है ,छिडकाव करते है और गाड़ियाँ भी धोते है ..हमें कल के लिए आज ही सोचना होगा...



Tuesday, December 1, 2009

शिक्षा को रोज़गार से जोड़ना होगा...




आज गली गली में स्कूल कालेज खुल गए है..सरकार की प्रोत्साहन नीति के चलते शिक्षा का खूब प्रचार प्रसार हो रहा है.लेकिन क्या ये शिक्षा रोजगार दिलाने में सक्षम है?शायद..नहीं ,क्यूंकि हमने कभी भी अपना शिक्षा तंत्र बनाने की कोशिश नहीं की। बस अंग्रेजों के बनाए तंत्र में ही कुछ फेरबदल कर दिया है.उसी का परिणाम है कि आज हम शिक्षा तो .उपलब्ध करवा रहे है लेकिन नौकरी नहीं.हमारी शिक्षा नौकरियों के मामले में सही नहीं है.इसके लिए हमें शिक्षा प्रणाली में बदलाव करना होगा।


आज की शिक्षा केवल डिग्री दे रही है..जिसका भी कोई महत्त्व नहीं है.हमें आज हमारी शिक्षा को रोज़गार मुखी बनाना होगा.आज जरूरत इस बात की है कि हम स्कूल ..लेवल से ही रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करें ताकि बच्चे समय रहते ही अपने रोजगार को चुन सके और उसमे पारंगत हो सके.आज हजारों बच्चे .प्राइमरी के बाद पढ़ना छोड़ देते है.ये बच्चे स्कूल छोड़ कर किसी ना किसी रोजगार को .अपनाते है.यही काम अगर हमारी शिक्षा देने वाली संस्थाएं करने लग जाए तो कोई बच्चा स्कूल छोड़ कर नहीं जाएगा.स्कूल में केवल किताबी ज्ञान देने से कुछ नहीं होने वाला,हमें इसमे रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रम .प्रारम्भ करने होगे.बच्चे को उसकी रूचि का पाठ्यक्रम चुनने की आज़ादी देनी होगी ,ताकि वह अपनी पसंद का रोज़गार कर सके।


आज कितने ही निजी संस्थान रोज़गार सम्बन्धी कोर्स चला रहे है,यही काम हमारी शिक्षा संस्थाएं भी बखूबी कर सकती है.इससे स्कूल छोड़ने की नौबत नहीं आएगी और बच्चे अपने पैरों पर भी खड़े हो सकेंगे.प्राचीन काल में गुरुकुल शिक्षण पद्धति इसी उद्देश्य को ध्यान में रख कर बनाई गई थी.वहां बच्चे शिक्षा के साथ साथ अन्य कलाओं में भी पारंगत .होते थे इसीलिए वे गुरुकुल से निकलने के बाद अपने अपने रोजगार में लग जाते थे.शिक्षा को रोजगार मुखी बनाने से जहाँ साक्षरता का प्रतिशत बढेगा ,वहीँ नौकरियों ,रोजगार की भी कमी नहीं रहेगी.....[फोटो गूगल से ]

Monday, November 23, 2009

महाराष्ट्र को एक राष्ट्र बनने से रोकें......


पिछले काफ़ी समय से महाराष्ट्र एक राज्य नहीं बल्कि राष्ट्र की भांति .व्यहवार कर रहा है .इसे जानबूझ कर बढ़ावा भी दिया जा रहा है.अब ये मात्र एक भाषा का मामला नहीं है.महाराष्ट्र के कुछ नेता अनर्गल प्रलाप करते है तो बाकी सारे उनका आँख मींच कर समर्थन करते है.अब ये अनायास नहीं बल्कि सोच समझ कर किया जा रहा है.देखिये पहले उन्होंने हिन्दी पर हमला बोला,अब अपने राज्य के लिए क्षेत्रीय आधार पर नौकरियों में .आरक्षण मांग रहे है...गैर मराठियों पर गाहे बगाहे हमला बोल देना उनकी आदत बन चुकी है.इन सब से सपष्ट है कि अब उन्हें एक राष्ट्र कि भांति दिखना पसंद आने लगा है.पहले बाल ठाकरे और अब राज ठाकरे से लेकर मुख्यमंत्री तक को एक राष्ट्राधयक्ष की तरह प्रदर्शित करना बहाने लगा है,तभी तो इनके तेवर हमेशा चढ़े ही रहते है.लेकिन महाराष्ट्र से चली ये आग यदि पूरे देश में फ़ैल गई तो क्या होगा?आज़ादी से पहले जिस तरह देश अलग अलग टुकड़ों में बंटा था ,ठीक वैसी ही .परिस्थितियां फ़िर से पैदा की जा रही है.और इन सब के लिए जिम्मेवार हमारे नेता अपनी राजनीती चमकाने में लगे है.पहले राज ठाकरे को उकसाने वाली कांग्रेस अब ख़ुद उसकी भाषा बोलने लगी है...अपनी खोई साख बनने के चक्कर में बाल ठाकरे फ़िर से ज़हर उगल रहे है ,और बाकि तमाम लोग आँखें मींचे चुपचाप ये पाप होते देख .रहे है...ना जाने इस देश का क्या होने वाला है???

Wednesday, November 11, 2009

हिन्दी है हम.......


अब इस गाने को गुनगुनाने पर भी "मनसे" को आपत्ति हो सकती है !क्योंकि इससे पहले हम मराठी,पंजाबी ,राजस्थानी या कुछ और है !देश को एक सूत्र में पिरोनी वाली हिन्दी आज अपने हाल पर आंसू बहा रही है!हर देश की .एक ..भाषा होती है जिस पर पूरे देश को गर्व होता है क्योंकि यही हमारी पहचान भी होती है !परन्तु हमारे देश में देखिये किस तरह से हिन्दी का अपमान किया जा रहा है...!हिन्दी फिल्मों से पहचान बनाने वाले कलाकार भी किस बेशर्मी से अंग्रेजी में साक्षात्कार देते है!क्यों?किसलिए?जो लोग आपकी फिल्में देखते है वे हिन्दी जानते समझते है ,फ़िर दूसरी भाषाक्यों?यही हाल नेताओं और खिलाड़ियों का भी है!ये अंग्रेजी बोल कर ही खुश होते है!आजकल सभी सरकारी कार्यालयों और बैंक आदि में हिन्दी में काम करने का लिखा होता है,लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होता है?दरअसल हिन्दी का अपमान हम स्वंय ही कर रहे है !

जब दूसरे देशों के .नेता भारत आते है तो .वे अपनी भाषा में ही बोलते है,और एक हमारे नेता है जो अपने देश में भी हिन्दी बोलने से हिचकिचाते है!आख़िर क्यों??यहाँ तक की स्कूली बच्चे भी इस नियम का बखूबी पालन करते दीखते है!और करे भी क्यूँ ना ,जब उनके सब बड़े ऐसा ही कर रहे है!बाज़ारों में सभी साइन बोर्ड अंग्रेजी में मुंह चिढाते दीखते है !आजकल .हिन्दी में अन्य भाषाओँ के बहुत से शब्दों को अपना लिया गया है ...फ़िर बोलने में कठिनाई क्यों?हम जब एक जगह से दूसरी जगह जाते है तो हिन्दी ही हमें आपस में जोड़ती है !ऐसी जगह जहाँ बहुत से प्रदेशों के लोग हो ,वहां हिन्दी ही उन्हें आपस में घुलने मिलने में मदद करती है!.फ़िर हिन्दी से ऐसा बर्ताव क्यों?और इस बार तो विधान सभा में ही हिन्दी का अपमान बहुत ही इज्ज़त से कर दिया गया!लेकिन सब खामोश है क्यों?क्यों नही दोषियों पर .राष्ट्र भाषा के अपमान का मामला चलाया गया?इस तरह तो देश एक दिन पुनः छोटे छोटे टुकडों में बंट जाएगा !इस देश को एक रखने के लिए हमें हिन्दी को .समुचित सम्मान देना ही होगा,जिसकी वो हक़दार है !हिन्दी को .इन राजनेताओं की राजनीती बनने से .रोकना होगा!हिन्दी जन जन की भाषा है और हमेशा रहेगी..!हमें इसका अपमान नहीं बल्कि सम्मान करना होगा!ये हमारी मजबूरी नहीं बल्कि नैतिकता है.....!जय हिन्दी!!!!जय .हिन्दुस्तान!!!!

Saturday, November 7, 2009

राज के बाद अब शिवराज...




ये तो होना ही था!राज ठाकरे ने जो .आग लगाई थी,वो तो बढ़नी ही थी !अब मध्यप्रदेश में भी शिवराज सिंह उसी राह .पर चल पड़े है! जब राज क्षेत्रीयवाद को भुना सकते है तो फ़िर शिवराज क्यों नहीं? महाराष्ट्र में राज की पीठ थपथपाने वाली कांग्रेस यहाँ विरोध कर रही है! ये देश की राजनीती में ..एक नया तूफ़ान .है इस तरह तो सभी राज्य अपनी अपनी डफली बजाने लगेंगे,जिसका सीधा नुक्सान देश की एकता को पहुंचेगा!क्षेत्रीय वाद की ये आंधी धीरे धीरे बढती ही जायेगी...!पर नेताओं को इससे क्या...स्व हित को देश हित से बड़ा मानने वाले ये नेता कभी भी ,कुछ भी कह सकते है! अभी कुछ दिनों पहले दक्षिणी राज्यों में भी हिन्दी .के खिलाफ खूब जहर उगला गया था,वंदे मातरम पर भी विवाद चल ही रहा हैआखिर हम देश को कहाँ ले जाना चाहते है?ये नेता लोग आख़िर कब .समझेंगे ?शायद कभी नहीं.....!जब पूरे देश में लोग मिल जुल कर रहते आए है और रह रहें .है तो फ़िर ये नेता क्यों सबको लड़ाने पर तुले है ....ये अपनी समझ से बाहर है.....

Saturday, October 31, 2009

सुरक्षा में चूक भारी पड़ी जयपुर को.....




बम विस्फोटों के बाद एक बार फ़िर जयपुर दहशत में है!इस बार भी जयपुर को सुरक्षा में खामी की कीमत चुकानी पड़ी है!यदि सुरक्षा पर थोडी सी भी सावधानी रखी जाती तो शायद ये हादसा नहीं होता!शाम साधे चार बजे पहली बार लीकेज का पता चला था ..लेकिन सात बजे तक कुछ ठोस कार्यवाही नहीं की गई ,जिसके चलते पूरे शहर की बन आई!सबसे बड़ी दुखदायी बात ये है की डिपो प्रबंधन को उस वक्त ड्यूटी दे रहे कर्मचारियों के बारे में भी पुख्ता जानकारी नहीं है!...और हमारा आपदा प्रबंधन देखिये..हादसा होते ही सब कुछ अस्त वयस्त हो गया..किसी के पास भी इस .स्थिति से निपटने की कोई योजना नहीं थी!क्या करें ,कसे करें?में ही वक्त बीतता गया और मुसीबत गहराती गई..!आपदा प्रबंधन प्रणाली पूरी तरह से .फ्लॉप हो गई!डिपो की आत्म रक्षा प्रणाली भी बंद थी ,जो की हादसे के समय स्वत ही शुरू होनी चाहिए!आग से लड़ने के लिए किसी के पास भी ना संसाधन थे और ना ही कोई .रण नीति ......!इन्ही सब के कारण एक मामूली चिंगारी ने देश के सबसे बड़े अग्निकांड को जन्म दे दिया..!यदि समय रहते आग को आगे बढ़ने से .रोक दिया जाता तो आज जयपुर को ये दंश ना झेलना पड़ता! डिपो के बड़े अधिकारी भी नहीं जानते .थे कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाए?इसी से सपष्ट है कि हमारी आपदा प्रबंधन प्रणाली कितनी कारगर है???

Saturday, October 24, 2009

साहसिक पर्वतारोही का सहयोग करें ...


बीकानेर के महान पर्वतारोही मगन बिस्सा जिन्होंने तीन बार एवरेस्ट पर विजय पाई है,आज जिंदगी की जंग लड़ रहें है !पहली बार १९८४ में बछेंद्री पल के साथ उन्होंने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था !तब उन्हें इस साहसिक कारनामें हेतु सेना मैडल भी दिया गया था !किंतु आज ये साहसी अकेला ही मौत का सामना कर रहा है!ना तो राज्य और ना ही केन्द्र सरकार .सहायता को आगे आई है!मगन बिस्सा राजस्थान एडवेंचर .फाउन्देशन के अध्यक्ष और नेशनल एडवेंचर फाउन्देशन के निदेशक भी है !पिछली सात मई को वे चौथी बार एवरेस्ट अभियान में घायल हो गए थे !इस बार वे अपनी पत्नी के साथ एवरेस्ट फतह करने निकले थे !तभी से वे अस्पताल के आई सी .यूं में भरती है !आख़िर में उनके कुछ शुभचिंतकों ने ही उनकी सहायता का बीडा उठाया है !उनकी सहायता हेतु एक वेबसाईट भी बनाई गई है,इस वेबसाईट पर जाने हेतु यहाँ क्लिक करें!इस पर बिस्सा जी के बारे में तमाम विवरण उपलब्ध है!राज्य और देश का नाम ऊँचा करने वाले बिस्सा जी की सहायता हेतु हम सब को अपना योगदान देना चाहिए....

Wednesday, October 21, 2009

'नई दुनिया' में हमारी मिठाइयां.....


दिवाली के शुभ अवसर पर पाबला जी ने संदेश दिया कि"नई दुनिया" के १७ अक्तूबर के अंक में 'ये दुनिया है' को स्थान मिला है!अब उनकी नज़र हमारी मिठाइयों पर लिखी गई पोस्ट को प्रिंट मिडिया में जगह मिली है!ये मेरे साथ साथ पूरे ब्लॉग परिवार के लिए हर्ष की बात है !दिवाली का इससे अच्छा तोहफा और क्या होगा!हमारे विचारों को सराहा गया ,ये एक अच्छी ख़बर है.....

Thursday, October 15, 2009

दीपावली की शुभकामनायें!!!!!!







जी हाँ ...अब तो ब्लॉग परिवार ही हमारा परिवार है!ब्लॉगजगत के सभी साथियों को दिवाली की शुभकामनाएं..!!!.आपसी स्नेह बनाए रखें...और जोर शोर से दिवाली मनाएँ...!!!पूरे ब्लॉग जगत परिवार को दिल से बधाई...